राजस्थान में किसान आंदोलन: इतिहास, कारण, प्रभाव और आधुनिक संघर्ष | RPSC, RSMSSB के लिए सम्पूर्ण नोट्स
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🌾 राजस्थान में
किसान आंदोलन
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भूमिका
राजस्थान का भूगोल,
उसकी जलवायु, सीमित
संसाधन, सामंती प्रणाली और
जागीरदारी परंपरा—सबने मिलकर
यहाँ के किसानों
को सदियों तक
संघर्ष करने पर
मजबूर किया।
ब्रिटिश शासन की
कठोर नीतियों और
रियासतों के दमनकारी
करों ने आम
किसान को आर्थिक,
सामाजिक और राजनीतिक
रूप से कमजोर
किया।
इन्हीं अत्याचारों के विरुद्ध
राजस्थान में कई
किसान आंदोलन हुए,
जिनमें बिजोलिया आंदोलन, बगरू
आंदोलन, बूंदी किसान आंदोलन,
मेवाड़ आंदोलन, शाहपुरा आंदोलन,
और आधुनिक दौर के
नहर विवाद, MSP आंदोलन,
बिजली आंदोलन विशेष
रूप से उल्लेखनीय
हैं।
यह लेख इन
आंदोलन का विस्तृत,
गहन और परीक्षा-उपयोगी विश्लेषण प्रस्तुत
करता है।
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अध्याय 1 : राजस्थान में
किसान आंदोलनों की
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
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राजस्थान में जागीरदारी
और भू-व्यवस्था
अत्यंत जटिल थी:
1. जागीरदारी और सामंती
शोषण
किसानों पर निम्न
प्रकार के कर
लगाए जाते थे:
लगान (Land Tax)
बेगार (Forced Labour)
लांचे, ताल
जावर, रखब, फाल-गद्दी, हाली-बली
जानवरों पर टैक्स
विवाह, जन्म, पर्व–त्यौहार पर जबरन
कर
कई बार कुल
कर 50% से भी
अधिक हो जाता
था।
2. बेगार प्रथा
किसान को बिना
मजदूरी:
किले बनवाने
राजा की
खेती
लकड़ी/पानी लाने
शादी-समारोहों
में मजदूरी देने
सेना का
सामान ढोने
जैसे कार्य करने पड़ते
थे।
3. ब्रिटिश हस्तक्षेप
ब्रिटिश:
नए कर
लगाए
भूमि Settlement किया
रियासतों पर नियंत्रण
बढ़ाया
किसानों से सीधा
लगान वसूला
इन सबने किसान
की स्थिति को
और भी खराब
किया।
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अध्याय 2 : राजस्थान में
किसान आंदोलनों के
कारण
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किसान आंदोलनों के मुख्य
कारण थे:
1. आर्थिक कारण
करों की
अधिकता
बेगार
फसल खराब
होने पर राहत
न मिलना
सूखा और
पानी की कमी
अत्यधिक लगान वसूलना
2. सामाजिक कारण
किसानों के साथ
अत्याचार
उच्च वर्ग
का प्रभुत्व
जातिगत भेदभाव
जागीरदारों की मनमानी
3. राजनीतिक कारण
प्रजामंडल आंदोलन का
प्रभाव
स्वतंत्रता संग्राम
राष्ट्रीय चेतना का
उदय
कांग्रेस और किसान
सभाओं की सक्रियता
4. पर्यावरणीय कारण
राजस्थान का सूखा
क्षेत्र
सिंचाई की कमी
वर्षा पर निर्भर
खेती
अकाल की
नियमितता
इन सभी कारणों
ने किसान आंदोलनों
की जमीन तैयार
की।
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अध्याय 3 : राजस्थान के
प्रमुख किसान आंदोलन
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यहाँ राजस्थान के सभी
मुख्य किसान आंदोलनों
का पूरा विवरण
दिया गया है।
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⭐ (1) बिजोलिया
किसान आंदोलन (1916–1941)
राजस्थान के इतिहास
का सबसे बड़ा
और सर्वाधिक प्रभावी
किसान आंदोलन।
स्थान:
मेवाड़ राज्य की
बिजोलिया जागीर (भीलवाड़ा)
मुख्य समस्याएँ:
86 प्रकार के कर
बेगार
जमीन से
बेदखली
राजपूताना के अन्य
जागीरदारों का उत्पीड़न
प्रमुख नेता:
फतेहकरन चारण (शुरुआत)
साधु सीताराम
दास
विजयसिंह पथिक
मानिक्यलाल वर्मा
हरिभाऊ उपाध्याय
महत्वपूर्ण चरण:
1. प्रथम चरण (1916–1920)
सीताराम दास की
नेतृत्व में “नवजीवन
संघ”
जनता के
बीच जगरूकता
किसानों का संगठित
होना
2. द्वितीय चरण (1920–1923)
विजयसिंह पथिक का
नेतृत्व
“हल नहीं
जुतने देंगे” आंदोलन
किसानों का लगान
देने से इनकार
गांधीवादी पद्धति का
प्रभाव
3. तृतीय चरण (1923–1941)
हरिभाऊ उपाध्याय और
मानिक्यलाल वर्मा का नेतृत्व
आंदोलन राष्ट्रीय स्तर
पर प्रसारित
कई बार
दमन, गिरफ्तारी
अंततः सरकार को
झुकना पड़ा
परिणाम:
बेगार समाप्त
करों में
कमी
किसानों का राजनीतिक
जागरण
राजस्थान में पहला
बड़ा संगठित आंदोलन
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⭐ (2) बगरू किसान आंदोलन (जयपुर)
प्रमुख मुद्दे:
अत्यधिक भूमिकर
किसानों से बेगार
जागीरदारों की ज्यादती
नेतृत्व:
रामनारायण चौधरी
जय नारायण
व्यास
प्रजामंडल नेताओं का
सहयोग
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⭐ (3) शाहपुरा
किसान आंदोलन
कारण:
लंगे कर
खेतों से बेदखली
राजपूताना नरेशों के
अत्याचार
परिणाम:
किसानों को सामूहिक
रूप से राहत
करों में
सुधार
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⭐ (4) मेवाड़ किसान आंदोलन
नेतृत्व:
माणिक्यलाल वर्मा
भूपाल सिंह का
विरोध
प्रजामंडल नेताओं की
सक्रियता
मुद्दे:
ज़ुल्म
कर वृद्धि
बेगार
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⭐ (5) बूंदी किसान आंदोलन
कारण:
जागीरदारों द्वारा जबरन
वसूली
पानी और
सिंचाई सुविधा का अभाव
परिणाम:
किसानों को आंशिक
राहत
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⭐ (6) टोंक किसान आंदोलन (1940–1947)
मुस्लिम नवाब के
अत्याचार
करों की
वृद्धि
उच्चजातीय भेदभाव
आंदोलन ने धार्मिक
एकता स्थापित की
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⭐ (7) बीकानेर
किसान आंदोलन
मुद्दे:
नहर व्यवस्था
पानी की
कमी
राजस्व बढ़ोतरी
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⭐ (8) झालावाड़
किसान आंदोलन
मुद्दे:
पुलिस अत्याचार
किसानों से बलपूर्वक
मनमाना कर
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⭐ (9) कोटा किसान आंदोलन
कारण:
भूमि Settlement
जल कर
सिंचाई कर
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अध्याय 4 : स्वतंत्रता के
बाद के किसान
आंदोलन
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राजस्थान के किसान
आंदोलन स्वतंत्रता के बाद
भी जारी रहे:
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⭐ (1) इंदिरा गांधी नहर आंदोलन
(1960–2000)
समस्या:
नहर का
पानी न मिलना
किसानों के खेत
सूख गए
हर साल
प्रदर्शन
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⭐ (2) बिजली आंदोलन (1990–2010)
कृषि बिजली
दरों में अचानक
बढ़ोतरी
बड़े पैमाने
पर किसान आंदोलन
सरकार को दरें
घटानी पड़ीं
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⭐ (3) आधुनिक
MSP आंदोलन (2017–2023)
प्रमुख माँगें:
लाभकारी MSP
कर्ज माफी
गन्ने, सरसों, बाजरा
का उचित भाव
स्थान:
गंगानगर
हनुमानगढ़
झुंझुनूं
नागौर
सीकर
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⭐ (4) राष्ट्रीय
किसान आंदोलन 2020–21 में
राजस्थान की भूमिका
सक्रिय जिलें:
श्रीगंगानगर
हनुमानगढ़
झुंझुनूं
नागौर
किसानों ने राजस्थान–हरियाणा सीमा पर
विशाल धरने दिए।
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अध्याय 5 : किसान आंदोलनों
के परिणाम
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सकारात्मक प्रभाव:
1. करों में कमी
2. बेगार का अंत
3. किसानों
की राजनीतिक जागरूकता
4. सिंचाई सुविधाओं का विस्तार
5. MSP में
बढ़ोतरी
6. किसान यूनियनों का गठन
नकारात्मक प्रभाव:
पुलिस दमन
गिरफ्तारी
आर्थिक नुकसान
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अध्याय 6 : राजस्थान किसान
आंदोलन और प्रतियोगी
परीक्षाएँ
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RPSC/RSMSSB में
बार-बार पूछा
जाता है:
बिजोलिया आंदोलन का
नेतृत्व
आंदोलन की तिथियाँ
महत्वपूर्ण कानून
प्रमुख नेता
शाहपुरा/बगरू आंदोलन
प्रजामंडल और किसान
संबंध
आधुनिक MSP आंदोलन
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निष्कर्ष
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राजस्थान के किसान
आंदोलनों ने यहाँ
के सामाजिक ढांचे
को नया रूप
दिया।
किसान केवल आर्थिक
अधिकार नहीं बल्कि
सम्मान, समानता और न्याय
के लिए लड़ता
रहा।
राजस्थान का इतिहास
बिना किसान आंदोलनों
के अधूरा है।
इन्होंने राजस्थान में लोकतंत्र,
समानता और सामाजिक
विकास की नींव
रखी।
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