राजस्थान के भौतिक प्रदेश : भू-आकृति, जलवायु और प्राकृतिक विविधता
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राजस्थान के भौतिक
प्रदेश (Physical Divisions of
Rajasthan)
भूमिका
राजस्थान भारत का
क्षेत्रफल की दृष्टि
से सबसे बड़ा
राज्य है। यह
देश के उत्तर-पश्चिमी भाग में
स्थित है और
इसका कुल क्षेत्रफल
लगभग 3,42,239 वर्ग किलोमीटर
है। राजस्थान की
भौगोलिक रचना अत्यंत
विविधतापूर्ण है — यहाँ
पश्चिम में मरुस्थल
की रेतिली भूमि
से लेकर दक्षिण-पूर्व में हरियाली
युक्त पहाड़ियाँ, पठार
और उपजाऊ मैदान
तक देखने को
मिलते हैं। इसी
कारण राजस्थान को
विभिन्न भौतिक प्रदेशों में
बाँटा गया है।
राजस्थान की भौतिक
बनावट को समझना
न केवल भूगोल
की दृष्टि से,
बल्कि कृषि, जल-विनियोजन, खनिज, जलवायु
और मानव जीवन
के अध्ययन के
लिए भी आवश्यक
है।
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राजस्थान
का भौगोलिक स्वरूप
राजस्थान का भौगोलिक
विस्तार 23°03’ से 30°12’ उत्तरी अक्षांश
और 69°30’ से 78°17’ पूर्वी देशांतर
तक फैला हुआ
है। राज्य की
सीमाएँ उत्तर में पंजाब
और हरियाणा, पूर्व
में उत्तर प्रदेश,
दक्षिण-पूर्व में मध्यप्रदेश
और पश्चिम में
पाकिस्तान से लगती
हैं।
राजस्थान का लगभग
60% भाग शुष्क मरुस्थलीय है,
जबकि शेष भाग
पठारी और पहाड़ी
है। राज्य की
ऊँचाई समुद्र तल
से औसतन 300 मीटर
से लेकर 1,722 मीटर
(गुरु शिखर, माउंट
आबू) तक है।
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राजस्थान
के प्रमुख भौतिक
प्रदेश
राजस्थान को भौतिक
स्वरूप के आधार
पर मुख्यतः चार
प्रमुख भौतिक प्रदेशों में
बाँटा गया है:
1. पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश (Western Desert Region)
2. अरावली पर्वतीय प्रदेश (Aravalli Mountain Region)
3. पूर्वी मैदानी प्रदेश (Eastern Plain Region)
4. दक्षिणी-पूर्वी पठारी प्रदेश
(South-Eastern Plateau Region)
अब इन प्रदेशों
का क्रमवार विस्तृत
अध्ययन करते हैं
—
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1 पश्चिमी
मरुस्थलीय प्रदेश
स्थिति
और विस्तार
यह प्रदेश राजस्थान
के लगभग 61% क्षेत्रफल
में फैला हुआ
है। इसका विस्तार
अरावली पर्वत श्रृंखला के
पश्चिमी भाग से
लेकर पाकिस्तान की
सीमा तक है।
इसमें जोधपुर, जैसलमेर,
बाड़मेर, बीकानेर, चूरू, श्रीगंगानगर,
हनुमानगढ़, नागौर आदि जिले
आते हैं।
प्रमुख
विशेषताएँ
इस
क्षेत्र की सबसे
बड़ी विशेषता यहाँ
की रेतिली भूमि
(Sand Dunes) है।
यहाँ
वर्षा बहुत कम
(10 से 40 से.मी.)
होती है।
तापमान
में अत्यधिक अंतर
पाया जाता है
– गर्मियों में 48°C तक और
सर्दियों में 2°C तक गिर
जाता है।
यहाँ
की प्रमुख नदियाँ
– लूणी नदी (मात्र
अस्थायी नदी), जो जोधपुर
से बहती हुई
कच्छ की खाड़ी
में विलीन हो
जाती है।
यहाँ
की मिट्टी – रेतीली,
जलधारण शक्ति कम और
उपजाऊपन भी बहुत
कम।
वनस्पति
– झाड़ीनुमा, जैसे बबूल,
थोर, कुमठा, खेजड़ी
आदि।
इस
क्षेत्र में भू-जल का
स्तर बहुत गहरा
है, लेकिन इंदिरा
गांधी नहर के
कारण कृषि योग्य
भूमि का विस्तार
हुआ है।
उप-प्रदेश
पश्चिमी मरुस्थल को दो
उप-प्रदेशों में
बाँटा गया है
–
1. थार मरुस्थल (Thar Desert) – जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर
क्षेत्र।
2. कच्छावटी मैदान (Semi-arid Zone) – नागौर, जोधपुर, चूरू
क्षेत्र।
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2️⃣ अरावली
पर्वतीय प्रदेश
स्थिति
और विस्तार
अरावली पर्वत श्रृंखला भारत
की सबसे प्राचीन
पर्वत श्रृंखला है।
इसका निर्माण भूगर्भीय
दृष्टि से प्राचीनतम
युग (Archean Period) में हुआ
था। राजस्थान में
इसका विस्तार लगभग
692 कि.मी. तक
फैला हुआ है।
यह श्रृंखला राज्य
को दो भागों
में बाँटती है
— पश्चिमी मरुस्थल और पूर्वी
हरित क्षेत्र।
प्रमुख
पर्वत शिखर
गुरु
शिखर (1722 मीटर) – अरावली का
सबसे ऊँचा शिखर,
माउंट आबू (सिरोही
जिला) में स्थित।
अन्य
प्रमुख शिखर – रायला पहाड़ी,
तारागढ़, दिलवाड़ा, कुंभलगढ़ आदि।
भौगोलिक
विशेषताएँ
यह
प्रदेश उदयपुर, सिरोही, राजसमंद,
भीलवाड़ा, अजमेर, नागौर, अलवर,
जयपुर जिलों तक
फैला है।
यहाँ
का भू-भाग
पथरीला है और
जल का अभाव
रहता है, फिर
भी यहाँ वर्षा
मरुस्थल की तुलना
में अधिक होती
है (60–100 से.मी.)।
यहाँ
की मिट्टी लाल
और भूरी प्रकार
की है।
इस
क्षेत्र में संगमरमर,
जस्ता, तांबा, सीसा, जिप्सम
आदि खनिज मिलते
हैं।
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3️⃣ पूर्वी
मैदानी प्रदेश
स्थिति
और विस्तार
अरावली पर्वत श्रृंखला के
पूर्व में फैला
यह क्षेत्र अपेक्षाकृत
उपजाऊ और समतल
है। यह प्रदेश
राजस्थान का कृषि
दृष्टि से सर्वाधिक
विकसित क्षेत्र है।
इसमें जयपुर, दौसा, भरतपुर,
करौली, धौलपुर, अलवर, सीकर,
टोंक, झुंझुनूं, नागौर
आदि जिले शामिल
हैं।
प्रमुख
विशेषताएँ
यहाँ
की प्रमुख नदियाँ
– बाणास, चंबल, बनास की
सहायक नदियाँ, पार्वती,
खारी, साबी आदि।
मिट्टी
– दोमट और जलोढ़
मिट्टी, जो कृषि
के लिए अत्यंत
उपयुक्त है।
जलवायु
– अर्ध-शुष्क से लेकर
उप-आर्द्र तक।
यहाँ
गेंहूँ, सरसों, चना, गन्ना,
गेहूँ, और फल-सब्जियों की खेती
होती है।
उप-प्रदेश
1. जयपुर-भरतपुर मैदानी क्षेत्र
2. चंबल घाटी क्षेत्र
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4️⃣ दक्षिणी-पूर्वी पठारी प्रदेश
स्थिति
और विस्तार
राजस्थान का यह
भाग दक्षिण-पूर्व
में स्थित है
और इसे “हाड़ौती
पठार” के नाम
से जाना जाता
है। इसका विस्तार
बूंदी, कोटा, झालावाड़ और
बारां जिलों में
है।
प्रमुख
विशेषताएँ
यह
भाग भूगर्भीय दृष्टि
से अपेक्षाकृत नया
है और यहाँ
लावा प्रवाह से
निर्मित मालवा पठार का
विस्तार देखने को मिलता
है।
औसत
ऊँचाई 400–600 मीटर।
यहाँ
की प्रमुख नदियाँ
– चंबल, पार्वती, काली सिंध।
मिट्टी
– काली मिट्टी (Regur Soil) जो कपास,
सोयाबीन, गेंहूँ आदि के
लिए उपयुक्त है।
यहाँ
वर्षा अपेक्षाकृत अधिक
(80–100 से.मी.) होती
है।
यह
क्षेत्र जल-विद्युत
उत्पादन और सिंचाई
की दृष्टि से
भी महत्वपूर्ण है
(गांधी सागर, कोटा बैराज,
राणा प्रताप सागर
आदि)।
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राजस्थान
के अन्य भौगोलिक
तत्व
1️⃣ प्रमुख
नदियाँ
राजस्थान की नदियाँ
स्थायी और अस्थायी
दोनों प्रकार की
हैं।
स्थायी
नदियाँ – चंबल, बनास, काली
सिंध, पार्वती।
अस्थायी
नदियाँ – लूणी, साभी, घग्घर।
2️⃣ प्रमुख
झीलें
सांभर
झील – सबसे बड़ी
खारे पानी की
झील।
पुष्कर
झील – धार्मिक दृष्टि
से प्रसिद्ध।
आनासागर
झील – अजमेर में
मानव निर्मित झील।
3️⃣ मिट्टी
के प्रकार
राजस्थान में प्रमुख
रूप से चार
प्रकार की मिट्टी
मिलती है –
1. रेतीली मिट्टी
2. जलोढ़ मिट्टी
3. लाल भूरी मिट्टी
4. काली मिट्टी
4️⃣ प्राकृतिक
वनस्पति
राज्य का अधिकांश
भाग शुष्क है,
फिर भी दक्षिण
और पूर्व में
हरित क्षेत्र पाए
जाते हैं। यहाँ
बबूल, नीम, खेजड़ी,
खैर, सालर, सेमल,
आम आदि वृक्ष
मिलते हैं।
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निष्कर्ष
राजस्थान की भौतिक
विविधता उसकी पहचान
है। जहाँ पश्चिम
में मरुस्थल जीवन
की कठोरता दर्शाता
है, वहीं दक्षिण-पूर्वी भाग में
हरियाली और उपजाऊ
भूमि राज्य की
समृद्धि को प्रदर्शित
करती है। अरावली
पर्वत श्रृंखला राज्य
की ‘प्राकृतिक रीढ़’
है जो न
केवल भौगोलिक बल्कि
सांस्कृतिक दृष्टि से भी
महत्वपूर्ण है।
राजस्थान का हर
भौतिक प्रदेश अपने
आप में विशिष्ट
है और राज्य
की भौगोलिक, आर्थिक
तथा सांस्कृतिक जीवनधारा
को आकार देता
है।
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